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| SOMETIMES, ITS OKAY TO LEAVE |
कभी कभी जीवन में ऐसा मोड़ आता है, जहां पर यह तय करना मुश्किल हो जाता है कि बने रहे या फिर छोड़ दे ?
कुछ इस तरह ही मेरी भी इस छोटी सी जिंदगी में एक ऐसा ही मोड़ आया कि इस कश्मकश से केसे निकलूं, साथ रहू या फिर छोड़ दू, क्या छोड़ना सही रहेगा ? जिसके साथ जिन्दगी का कुछ ऐसा पल बिताया हो जो भुलाए भी ना भुलाया जाए, हसना हो या फिर रोना हो या फिर किसी मुसिबत का सामना करना हो या फिर कही पर साथ घूम कर मस्तियाँ करनी हो, कुछ ऐसे ही खट्टी मीठी यादें थीं जो हमने साथ बिताये थे, तो फिर ऐसा क्या हुआ जो मुझे अपनी लाईफ से उस कहानी को बंद करना पढा जिसमें इतनी अच्छी यादे थी।
अक्सर रिश्ते को बचाने के लिए हम कई बार झुक जाते हैं और क्या हर बार झुकना ही सही होता हैं मेरे साथ भी कुछ ऐसा ही ही हुआ था उसकी हर गलतियो को उसको नसमझ बन कर माफ कर दिया करता था लेकिन इस बार कुछ ऐसी गलती थी जिससे मेरे माफ कर देने से रिश्ता तो बच जाता लेकिन उस रिश्तों में जान नही रहती या फिर यूँ कहूँ उस रिश्ते के साया को अपने आस पास रख कर मे अपने आप को पूरा खो देता ।
हाँ, कुछ चीजों को छोड़ने का फैसला करना आसान नहीं होता कि आपने जिस शख्स के साथ जिन्दगी के जो यादगार लम्हे बिताए हे उन्हे पीछे छोड़ जिन्दगी में आगे बढ जाना बहुत कठिन होता है। हम सभी ने कभी न कभी इस पहेली की उलझन मे उलझे होंगे करे तो करे क्या। लोग आपके आगे बढ जाने के निर्णय के लिए आपको दोष देते हैं, वे आपसे सवाल करते हैं, आपके वचनों पर प्रश्न करते हैं जो आप दोनो ने साथ में करे होंगे, और न जाने क्या-क्या नहीं कहा जाता है। लेकिन कभी कभी हमे सही समय पर वह से चले जाना ही सही होता और इसीलिए वह से चले जाने के बाद ही आपको वह चीज मिल जाती हैं जो चीज आप उस शख्स में ढूँढ रहे होते हैं।
हम हमेशा उस शख्स साथ रहने के वायदे किया करते हैं, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि हम खुद के अस्तित्व की ही कीमत लगा दे। आपको किसी के ऊपर आपने आप को चुनने के लिए दोषी होने की आवश्यकता नहीं है। हम सबकी अपनी-अपनी अलग अलग ख्वाहिशें होती हैं जिन्हें पूरा करना होता है। रिश्तों के जाल में उलझकर हम अपने सपनों को खोना बर्दाश्त नहीं कर सकते। कभी-कभी, आपको खुद को खोजने के लिए अपने अस्तित्व की पहचान के लिए दूर जाना पड़ता है। खुद को प्राथमिकता देना समय की मांग भी हैं और जरुरत भी हैं ।
हां, जीवन में खुशियां पाने के लिए कुछ लोगों, दोस्तो और रिश्तों को पीछे छोड़ना पड़ता है। जब आपने अपनी खुशियों की चाबी किसी और के हाथो में दी और आप इस इस सच को स्वीकार करते है कि आपने गलती की, और अब, आप इसे फिर से नहीं होने दोहराना चाहते हैं। हमे अपनी क्षमताओं को जानना और उन चीजों को छोड़ देना चाहिए जो आपके और आपकी खुशी के बीच आती हैं, तब जाकर आप अंदर से खुश होते हैं। अपने निर्णयों के लिए कभी भी खेद महसूस नही करने चाहिए क्योंकि अंततः वह हमारे ही है ।
कभी-कभी छोड़ जाना ही बेहतर होता हैं ।।।
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Click Here :- विजय कुमार




Kabhi kabhi chhor jana hi behtar hai.....
ReplyDeleteKisi s yuh or umeed lgna k wo wapas ayga or sath dga...
Uski jrurt k hisab s uska aana or jna...
Uske sach khne ko uhh bina jane k wo galat ho skta h sach man lna...
Aur bad m afsos krna..isss acha...
Kabhi kabhi chale jna hi acha h....
🤞🤞🤞 जी भाई कभी तो स्वार्थी हो कर अपने लिए भी जिन्दगी जीना चाहिए ।
DeleteSahi kaha ....
ReplyDeleteKabhi kabhi chhod dena hi sahi hota hai....
Vo yaade, vo baate aur hasane or rulaane vali rate... jab sab saabit ho jaaye bekaar ki baate... to chhod dena hi behtar hota hai...
जी भाई ! आपकी शायरी भी लाजवाब है ।
DeleteVijay bhai wo yaade...kuch aur hi thi good keep it up
ReplyDeleteसही कहा भाई वो कॉलेज की यादें ।।❣❣❣❣
Deleteकॉलेज आज भी याद आता है...
ReplyDeleteजी भाई। काॅलेज ही जिसने जिंदगी के सही मायने सिखाए ।।
Deletevijay bhai bhulna padhega tum ko vo sab baate,
ReplyDeleteVery nice story and message Vijaya 😊
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